सोमवार, 20 जून 2016

vishwas kya hai,kyo jaruri hai

आज के युग मे विश्वास करने योग्य कोई नहीं है ऐसा कहा जाता है,
यह समाज के लिए देश के लिए भयावह स्थ्ति है, जीवन से यदि विश्वास ही खत्म हो जाएगा तो बचा क्या है? जीवन के इसी के विश्वास के भरोसे से ही बहू ससुर के साथ रहती है,बेटे का भरोसा इसका संबल है।
हर उस स्थान पर भरोसा टूट रहा है ? यह काम हो जाएगा विश्वसनीयता के साथ कहा जाता है? काम नहीं होता, फिर इस विश्वसनीयता का क्या हश्र होगा? बेटी का भरोसा बाप नहीं होगा तो कोन होगा? बेटी ही विश्वास घात का शिकार होती है, पति पत्नी भी इसी घात के शिकार होते है, यही घात कुछ भी करा सकता है? एक दूसरे से हमेशा के लिए जुदा करने का यही कारण है। जीवन अद्भुत है, बेटा माँ से इसी की परीक्षा लेता है ? शिक्षक ही विद्यार्थी बन जाय इससे बड़ा महा पाप क्या हो सकता है, यही हो रहा है, मित्र का मित्र पर भरोसा नहीं, मालिक का नौकर पर भरोसा नहीं है, नौकर, मालिक आड़े वक्त मे काम आएगा इसका विश्वास नहीं है, कही पर भी किसी को किसी का विश्वास नहीं है, बेटा बाप को हार मे साथ देगा मानता नहीं है। अफसर कब साथ छोड़ देगा यह जानकर ही कर्मचारी काम नहीं करता है, अजीब ऊहा पोह की स्थिति बनी है, कोन कब किसको काटेगा विश्वास नहीं है , यही व्यवस्था, समाज और देश भुगत रहा है, यह भी सही है कि अंधविश्वासियों का दायरा बहुत बड़ गया है, इसी कारण अनेक लोग सब कुछ लुटाकर बैठे है, नेता पर विश्वास करते है वही विश्वासघाती हो रहा है, जिनके दम पर हम बने है उसे ही आँख दिखा रहे है? उनसे मिलने के लिए हम तरस रहे है, अपना दुखड़ा सुनाना चाहते है, कोई सुनना चाहता ही नहीं, एक बार किसी पर विश्वास करने की परीक्षा देने को कोई तैयार नहीं। यह विश्वास समाज मे कैसा आएगा समझ के परे है। मै यह मानता हूँ कि यह एक दिन जरूर आएगा। फिर कृष्ण सुदामा पर विश्वास करेगा। राम का विश्वास सीता पर होगा। अर्जुन भ्रम मे नहीं रहेगा। एक लव्य को गुरु मिल जाएगा। हमारा चुना प्रतिनिधि हमारे लिए काम करेगा। पता नहीं यह समय कब आएगा, किन्तु यह तय है कि इस समय को आना ही है।ओर ये समय आकर रहेगा, विश्वास नही हो तो शायद जिन्दगी   के मायने ही पलट जाये,

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