मंगलवार, 12 अप्रैल 2016

कबीर वाणी

हे ईश्वर....
मो को कहाँ ढूँढे रे बन्दे,
मैं तो तेरे पास में॥
ना तीरथ में, ना मूरत में,
ना एकांतनिवास में ।
ना मंदिर में, ना मस्जिद में,
ना काबे कैलाश में ॥
ना मैं जप में, ना मैं तप में,
ना मैं ब्रत-उपवास में ।
ना मैं क्रियाकर्म में रहता,
नहीं योग संन्यास में ॥
नहीं प्राण में, नहीं पिण्ड में,
ना ब्रह्मांड अकाश में ।
ना मैं भ्रुकुटि भँवर गुफा में,
सब श्वासन की श्वास में ॥
खोजी होय तुरत मिलि जाउँ,
एक ही पल की तलाश में ।
कहत कबीर सुनो भाई साधो,
मैं तो हूँ विश्वास में ॥

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