मंगलवार, 12 अप्रैल 2016

नानक के कथन

नानक कहते हैं, उपाय एक ही है कि उसके हुक्म और उसकी मर्जी के अनुसार सब उस पर छोड़ दो। जैसा वह जिलाए, जीयो। जैसा वह कराए, करो। जहां वह ले जाए, जाओ। उसका हुक्म तुम्हारी एक मात्र साधना हो जाए। तुम अपनी मर्जी हटाओ। उसकी मर्जी को आने दो। तुम स्वीकार कर लो जीवन जैसा हो। परमात्मा ने दिया है, वही जाने। तुम इंकार मत करो। दुख आए तो दुख को भी स्वीकार कर लो कि उसकी मर्जी। और अहोभाव रखो, धन्यभाव रखो कि अगर उसने दुख दिया है तो जरूर कोई राज होगा, कोई अर्थ होगा, कोई रहस्य होगा। तुम शिकायत मत करो। तुम धन्यवाद से ही भरे रहो। वह तुम्हें जैसा रखे। गरीब, तो गरीब। अमीर, तो अमीर। सुख में, तो सुख में। दुख में, तो दुख में। एक बात तुम्हारे भीतर सतत बनी रहे कि मैं राजी हूं। तेरा हुक्म मेरा जीवन है।

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